22 दिन की बस यात्रा - भाग 4
यात्रा संस्मरण - भाग 4
चेन्नई के बाद अगला पड़ाव था तिरुपति | किन्तु हमारे ड्राइवर महोदय यानि कि कुक्कू जी वहां ना जा कर, नांदेड़ में 2-3 दिन रहना चाहते थे | नीचे तिरुपति शहर में ही एक मंदिर के दर्शन करा कर बोले कि तिरुपति हो गया। परन्तु यहां के बारे में कुछ यात्री जानते थे, और आधे यात्रियों ने ऊपर तिरुपति तिरुमला देवस्थान जाने का निर्णय ले लिया। जब तक ऊपर बालाजी के दर्शन हुए तो तिरुपति शहर वापिस जाने के लिए अंतिम बस निकल चुकी थी और हम सुबह की पहली बस से वापिस आए।
जो यात्री दर्शन के लिए ऊपर गए थे, जैसे हम, तो हमारा सारा समान बस में ही अव्यवाथित और खुला छोङ कर गए थे। कुछ ना जाने वाले यात्री वहीं बस में ही या बस की बगल में सोए थे। उनका काफी सामान चोरी हो गया। बाला जी के दर्शनों जाने वाले किसी यात्री का कोई नुक़सान नहीं हुआ। अब संयोग हुआ या बालाजी का चमत्कार, आप स्वयं ही निश्चित कीजिए। में तो इसे चमत्कार ही मानता हूं।
तिरुपति दर्शन के बाद नांदेड़ जा पहुंचे, हुज़ूर साब के दरबार में माथा टेका। गोदावरी स्नान का आनंद लिया। उन दिनों नदी का जल बहुत स्वच्छ हुआ करता था, अब तो पानी बहुत कम है और गंदा भी बहुत है। लंगर प्रसाद पा कर चले जबलपुर की ओर | नर्मदा जी पे भेडा घाट पर नाव द्वारा सैर कर के मंत्रमुग्ध हो गए। संगमरमर की चट्टानों में घूमने का बहुत आनंद आया। धुआं धार का भी मस्त नजारा था।
भले ड्राइवर न ले जाना चाहे लेकिन आप लोग तिरुपति दर्शन कर आये ये ही बहुत है और उस समय 1979 में सामान चोरी होने बहुत दुखद...तिरुपति से नांदेड़ फिर जबलपुर वाह बहूत बढ़िया रूट लिया है...बढ़िया जा रहे है आप सब लोग
ReplyDeleteधन्यवाद प्रतीक जी। आप ने इस लेखन में बहुत उत्साह बढ़ाया है।
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