22 दिन की बस यात्रा - भाग 3
यात्रा संस्मरण - भाग 3
अब अगला पड़ाव जो की इस यात्रा का सबसे दूरस्थ स्थल कन्याकुमारी था। मदुरै से रात को किसी समय निकले तो अगले दिन सुबह सुबह कन्याकुमारी के विवेकानंद पुरम में बस खड़ी थी। सुंदर हवा चल रही थी। अच्छे कमरे मिल गए, स्नान आदि करके थोड़ा नाश्ता किया और चल पड़े विवेकानंद राक की तरफ। बोट पर उन दिनों मात्र 25 पैसा टिकट थी। सारा दिन आराम से घूमे, गांधी समाधि वा देवी मंदिर के दर्शन किए। वहीं पर तीनों समुंद्रो का संगम है और पानी का रंग भी अलग अलग प्रतीत होता है।
कन्याकुमारी के बाद पहुंचे हम त्रिवेंद्रम के प्रसिद्ध और विश्वविख्यात कोवलम बीच पर | हरे भरे नारियल के पेड़ों से सटा यह बीच वाकई बहुत सुंदर है। उत्तंग लहरों और काली रेत से सुसज्जित इस तट के बाद हम पहुंच गए श्री पद्मनाभ स्वामी के दर्शनों के लिए। भगवान विष्णु की सुंदर मुद्रा से सुसज्जित और वेदपाठी ब्राह्मणों की मंत्रध्वनी से जीवंत रहता है यह मंदिर। परन्तु समय की पाबंदी है, इसलिए समय पता कर के जाए। खैर रात्रिभोज उपरांत हम निकल पड़े एक और महातीर्थ रामेश्वरम की ओर।
उन दिनों शायद समुद्र पर सड़क मार्ग नहीं था | बस मण्डपम तक ही गई और वहां से हम लोकल ट्रेन द्वारा रामेश्वरम पहुंचे। क्या अद्भुत नजारा था। समुद्र में ऐसा खुला स्नान केवल रामेश्वरम में ही संभव है। एक दम शांत समुद्र और दूर दूर तक सिर्फ कमर की गहराई तक पानी। इसके बाद 22 कुओं का स्नान व भगवान के दर्शन। समय का थोड़ा अभाव था तो और कुछ देखे बिना शाम की ट्रेन से मण्डपम पहुंचे जहां हमारी यात्राबस इंतज़ार कर रही थी। ड्राइवर मुस्तैदी से बस की रक्षा में था क्यों कि उन दिनों वहां चोरी आदि की बहुत समस्या थी।
रामेश्वरम से रात को निकलें और सुबह तिरुचिरापल्ली पहुच गए। कावेरी नदी पूरे उफान पर थी थोड़ा स्नान कर श्री रंगम जी मंदिर के बाहर से ही दर्शन किए | मुझे याद है, वहीं नदी किनारे एक वृद्ध अम्मा अंगीठी पर प्लेन डोसा के साथ मिर्च की चटनी का नाश्ता करा रही थी बड़े सस्ते दामों में। बहुत स्वादिष्ट था यह। तिरुचिरापल्ली से हम पहुंचे चेन्नई जो की उस समय मद्रास कहलाता था। बहुत बड़ा बीच है मरीना। स्नेक पार्क भी अद्भुत है।
क्रमशः
Kamaal ki baat ye hai ki 13 varsh
ReplyDeleteki aayu hone ke bawajood aapko ye tak yaad hai ki kahan snaan kiya...kab kya khaya... Zaroor hi ek yadgaar safar rha hai aapka... 🙏
जी श्रीमान जी कुछ याद है और काफी कुछ भूला भी होउंगा।
DeleteApki yatra kitni yaadgaar thi....🙏
ReplyDeleteजी श्रीमान , ऐसी यात्रा की यादे ता उम्र चलती है।
Deleteअरे वाह उस समय सड़क मार्ग नही था तो पम्बन पुल से ट्रेन से गए ये भी unique अनुभव है जिन्होंने किया है क्योंकि अब तो सड़क बन गयी है और रामेश्वरम सड़क से जाया जा सकता है अब....बढ़िया लिख रहे है सर आप
ReplyDeleteDhanyawad Prateek ji
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